टीम इंडिया के पूर्व हरफनमौला युवराज सिंह ने करियर के अंतिम दिनों में किया था ऐसा व्यवहार

टीम इंडिया के पूर्व हरफनमौला युवराज सिंह ने करियर के अंतिम दिनों में किया था ऐसा व्यवहार

टीम इंडिया (Team India) के पूर्व हरफनमौला युवराज सिंह (Yuvraj Singh) ने हाल ही में बोला था कि उनके साथ करियर के अंतिम दिनों में अच्छा व्यवहार नहीं किया गया था.

 जबकि उनके पिता व पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह (Yograj Singh) सिक्सर किंग के करियर को बरबाद करने का आरोप टीम इंडिया के पूर्व कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) पर लगाते हैं, लेकिन युवराज टीम से बाहर होने के लिए जिम्मेदार न तो धोनी को मानते हैं व न ही टीम इंडिया के मौजूदा कैप्टन विराट कोहली (Virat Kohli) को, बल्कि उनका मानना है कि इन दोनों कप्तानों ने उनका समर्थन किया.

कोहली के समर्थन से ही की वापसी

युवराज सिंह ने बोला कि वेस्टइंडीज दौरे में बेकार प्रदर्शन के बाद जब 2017 में उन्हें एकदिवसीय टीम से बाहर कर दिया गया था. तब वह महेंद्र सिंह धोनी ही थे, जिन्होंने उनके अंतर्राष्ट्रीय करियर की सच से से रूबरू कराया था. इस दौरे से पहले 2017 में आईसीसी चैपियंस ट्रॉफी (ICC Champions Trophy) की चार पारियों में वह महज 105 रन बना पाए थे. युवी ने बोला कि कैप्टन विराट कोहली के समर्थन की वजह से ही वह वापसी कर पाए. अगर वह उनका समर्थन नहीं करते तो वापसी नहीं कर पाते. युवराज ने बताया कि पंजाब की ओर से उन्होंने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया था, तब धोनी ने उन्हें इस सच्चाई से रू-ब-रू कराया था कि चयनकर्ता 2019 दुनिया कप (ICC ODI World Cup 2019) की टीम में उन्हें नहीं देख रहे हैं.

कैंसर से वापसी के बाद नहीं किया विश्वास

युवराज सिंह धोनी की कप्तानी में 2011 के दुनिया कप (ICC ODI World Cup 2011) में बेहतरीन प्रदर्शन किया था. वह टूर्नामेंट में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट (Player of the tournament) रहे थे. इसके बाद उन्हें कैंसर हो गया था. उपचार के बाद 2013 में उन्होंने वापसी की. इंग्लैंड के विरूद्ध कटक में खेले गए एकदिवसीय मैच में 150 रन की शानदार पारी खेली, लेकिन इसके बाद लगातार आठ पारियों में सिर्फ एक अर्धशतक ही लगा पाए. इस कारण उन्हें टीम से बाहर जाना पड़ा. युवराज ने बोला कि वह इसके लिए किसी को गुनाह नहीं देते. लेकिन यह हकीकत है कि कैंसर से वापसी करने के बाद उन पर किसी ने विश्वास नहीं किया. यहां तक कि उन्हें खुद अपने खेल को लेकर पहले जैसा आत्मविश्वास लाने में समय लगा था.

विश्व कप 2011 से तक धोनी को था भरोसा

युवराज ने बोला कि 2011 दुनिया कप तक धोनी को उन पर बहुत ज्यादा भरोसा था. वह बोला करते थे कि आप टीम के मुख्य खिलाड़ी हैं. लेकिन बीमारी से वापसी के बाद उनके खेल में बदलाव हो गया व टीम में भी कई परिवर्तन हुए. युवराज ने बोला कि चीजों को लेकर बैठे नहीं रह सकते. कैप्टन को अपनी टीम को आगे बढ़ाना होता है. जहां तक 2015 दुनिया कप (ICC ODI World Cup 2015) का सवाल है, तो आप वास्तव में किसी वस्तु पर ध्यान नहीं दे सकते. यह व्यक्तिगत निर्णय होता है. एक कैप्टन के तौर पर कई बार आप सभी चीजों को उचित नहीं ठहरा सकते, क्योंकि अंत में आपको देखना होता है कि देश कैसा प्रदर्शन करेगा.

सभी कैप्टन करते हैं

युवी ने बोला कि दुनियाभर के कैप्टन कुछ खिलाड़ियों के लिए खड़े रहते हैं. चाहे वह सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) रहे हों या फिर रिकी पोंटिंग (Ricky Ponting). किसी खिलाड़ी का समर्थन करना या नहीं करना, यह उनका व्यक्तिगत पसंद होता है. उनके लिए धोनी से जितना हो सका, उन्होंने किया. युवराज ने बोला कि उन्हें लगता है कि धोनी ने सुरेश रैना (Suresh Raina) व रविंद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) का समर्थन किया, जब वह फॉर्म में नहीं थे. अच्छा वैसे ही विराट कोहली लोकेश राहुल (Lokesh Rahul) का समर्थन करते हैं.

पंजाब की टीम का मेंटर बनकर हैं खुश

संन्यास के बाद युवराज सिंह पिछले कनाडा लीग, अबु धाबी में हुए टी-10 लीग में खेल चुके हैं. उन्हें हाल ही में पंजाब क्रिकेट टीम का मेंटर नियुक्त किया गया है. युवराज ने बोला कि मेंटर बनकर वह बेहद उत्साहित हैं. इसके अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय लीग में खेलने के बारे में उन्होंने बोला कि कुछ में खेल सकते हैं. वैसे इस बारे में सोचा नहीं है कि दोबारा घरेलू क्रिकेट खेलूंगा या नहीं, लेकिन उन्हें किसी वस्तु का कोई अफसोस नहीं है.