तालिबान व अफगान सरकार के साथ बातचीत रद्द होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की परेशानियां बढ़ी

तालिबान व अफगान सरकार के साथ बातचीत रद्द होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की परेशानियां बढ़ी

तालिबान व अफगान सरकार के साथ बातचीत रद्द होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की परेशानियां बढ़ती जा रही है. अमेरिका में अगले वर्ष राष्ट्रपतिचुनाव होना हैह इससे अच्छा पहले अफगानिस्तान को लेकर किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना चाहतेहैं. इसी को लेकर दोनों पक्षों के साथ उसने आठ सितम्बर को एक मीटिंग प्रस्तावित की थी.

राष्ट्रपति ट्रम्प ने पिछले महीने 30 अगस्त को अपने शीर्ष सलाहकारों की मीटिंग बुलाई थी व अफगानिस्तान मुद्दों को लेकर चर्चा की थी. मीटिंग में ट्रम्प ने इस पर चर्चा की थी कि अफगानिस्तान में पिछले 18 महीनों से जारी युद्ध व हिंसा की घटनाओं से किस प्रकार अमेरिका को बाहर निकाला जाए व उनके कार्यकाल के दौरान तक एक शांति योजना लाई जा सके.

पोम्पियो व बोल्टन के बीच अफगान मामले पर विवाद है

इस मीटिंग में विदेश मंत्री माइक पोम्पियो व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन आर बोल्टन के बीच विवाद नजर आया. विदेश मंत्री व उनके वार्ताकार जल्मे खलीलजाद अफगानिस्तान में बिना शांति स्थापित किए सेना वापसी का विरोध कर रहे हैं. वहीं, बोल्टन बिना किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचे सेना वापसी की बात कर रहे हैं. बोल्टन ने वॉर्सा से एक वीडियो के माध्यम से बोला था कि ट्रम्प को अफगानिस्तान में किसी अमेरिकी सेना के मारे जाने से पहले ही उसे वापस लेने का निर्णय ले लेना चाहिए.

  1. ट्रम्प ने हालांकि इस मौके पर कोई फैसला नहीं लिया. लेकिन उन्होंने मीटिंग के दौरान वाशिंगटन में आठ सितम्बर को तालिबान व अशरफ गनी के साथ एक बातचीत को अंतिम रूप देने पर विचार किया था. ट्रम्प का बोलना था कि वह राष्ट्रपति अशरफ गनी को भी मीटिंग में आमंत्रित करेंगे. अफगान सरकार इस बातचीत में पक्षकार नहीं है.

  2. ट्रम्प ने 5 सितंबर को हुए कार बम धमाके में एक अमेरिकी समेत 12 लोगों की मृत्यु हो गई थी. इसके बाद इस मीटिंग को रद्द कर दिया गया. ट्रम्प ने शनिवार रात को ट्वीट कर इसकी घोषणा की थी. इसके बाद न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा के अधिकारियों बल्कि सरकार के सभी मेम्बर चौंक गए जो इस बातचीत में शामिल थे.

  3. ट्रम्प ने जब से अपना पदभार संभाला था, वह तब से अफगानिस्तान से सेना की वापसी को लेकर अपना ध्यान केंद्रित किए हुए थे. ताकि इससे अगले वर्ष होनेवाले चुनाव में उन्हें मदद मिल सके. अफगानिस्तान के पूर्व राजदूत खलीलजाद पिछले एक वर्ष से तालिबान से वार्ता पास बनाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं.

  4. अमेरिका व तालिबान के बीच दोहा व कतर में नौ राउंड की वार्ता हो चुकी है. इस दौरान दोनों पक्षों ने कई मुद्दों पर सहमति बना ली थी. खलीलजाद ने भी घोषणा की थी कि समझौते के दस्तावेज को सैंद्धांतिक तौर पर अंतिम रूप दिया जा चुका है.

  5. इस समझौते में बोला गया था कि अगले 16 महीनों में अफगानिस्तान से 14 हजार अमेरिकी सैनिकों को धीरे-धीरे बाहर निकाल लिया जाएगा व इसके उल्टा तालिबान आतंकवाद के विरूद्ध अफगानिस्तान के जमीन का प्रयोग नहीं होने देगा. लेकिन अफगान सरकार ने इसकी आलोचना करते हुए बोला था कि इस बातचीत में स्थायित्व स्थापित करने जैसे मुद्दों की कमी है.

  6. बोल्टन हमेशा इस समझौते के विरूद्ध रहे क्योंकि पोम्पियो के सहयोगियों ने सुरक्षा सलाहकार को इस वार्ता से हमेशा अलग करने की प्रयास की. बोल्टन ने तर्क दिया था कि ट्रम्प बिना किसी समझौते के एक संख्या तक सेना छोड़कर करीब पांच हजार सैनिकों को बाहर निकाल सकता है. अमेरिकी सरकार का एक तबका इस तर्क पर सहमत नहीं है.