PM मोदी व जिनपिंग की हुई यह बड़ी मुलाक़ात, इन मामलों पर होगी बात

PM मोदी व जिनपिंग की हुई यह बड़ी मुलाक़ात, इन मामलों पर होगी बात

तमिलनाडु के महाबलीपुर में 11-12 अक्टूबर को पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) व चाइना के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दूसरी अनौपचारिक शिखर मीटिंग होने जा रही है। दोनों नेता यूनेस्को के कुछ दुनिया धरोहर स्थलों का भ्रमण करेंगे व कलाक्षेत्र द्वारा प्रस्तुत एक सांस्कृतिक प्रोग्राम में भी शिरकत करेंगे। चाइना के राष्ट्रपति शी, पीएम मोदी से अपनी प्रस्तावित मीटिंग के लिए 11 अक्टूबर को दोपहर बाद चेन्नई पहुंचेंगे। यह जगह महाबलीपुरम से 50 किलोमीटर दूर है।

सूत्रों ने बोला कि दोनों नेता महाबलीपुरम में शाम को मीटिंग करेंगे, व पीएम मोदी राष्ट्रपति जिनपिंग को तटीय शहर में पल्लव शासकों द्वारा निर्मित कुछ ऐतिहासिक धरोहरों पर ले जाएंगे। उन्होंने बोला कि मोदी चाइना के राष्ट्रपति के सम्मान में रात्रिभोज भी देंगे, व दोनों नेता वहां कलाक्षेत्र के सांस्कृतिक प्रोग्राम में शामिल होंगे।

सूत्रों ने बताया कि इसके बाद दोनों नेता 12 अक्टूबर को अपने प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के दूसरे चरण में शामिल होंगे, जिसके बाद शी अपराह्न दो बजे स्वदेश रवाना हो जाएंगे।

दूसरे दिन की बातचीत ताज समूह द्वारा संचालित फिशरमैन्स कोव में होगी। चूंकि बातचीत अनौपचारिक है तो कोई औपचारिक वार्ता, या किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होंगे।

डोवाल व वांग यी शामिल होंगे
बातचीत में हिंदुस्तान की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी के अतिरिक्त विदेश मंत्री एस। जयशंकर व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल व चाइना की तरफ से जिनपिंग के अतिरिक्त चाइना के विदेश मंत्री वांग यी शामिल होंगे।

महाबलीपुरम का चाइना से कनेक्शन
सूत्रों के अनुसार, इतिहास व संस्कृति में दोनों नेताओं की समान रुचि होने के कारण दूसरी अनौपचारिक बातचीत के लिए दुनिया विरासत स्थल महाबलीपुरम को चुना गया है, व महाबलीपुरम का चाइना के साथ भी ऐतिहासिक संबंध है। जहां पीएम दूसरी अनौपचारिक बातचीत के लिए नयी दिल्ली के अतिरिक्त किसी व जगह की ख़्वाहिश जता रहे थे, वहीं दोनों पक्ष राष्ट्रीय राजधानी के बाहर ऐसे जगह की तलाश कर रहे थे, जहां शिखर मीटिंग की जा सके व जहां का नजदीकी हवाईअड्डा एक बड़े विमान के लिए उपयुक्त हो। महाबलीपुरम न सिर्फ बड़ा पर्यटन स्थल है, बल्कि चेन्नई के निकट भी है व यहां चाइना के बौद्ध भिक्षु ह्वेन सांग ने भी 17वीं शताब्दी में दौरा किया था।