पानी में डूबे खेतों की मेड़ पर चलकर घायल की झोपड़ी में पहुंची प्रियंका, वह अपना सब दर्द भूल गया

 पानी में डूबे खेतों की मेड़ पर चलकर घायल की झोपड़ी में पहुंची प्रियंका, वह अपना सब दर्द भूल गया

सोनभद्र के उभ्भा गांव की प्राइमरी स्कूल में जमीन पर बैठकर गोलीकांड के मृतकों के आश्रितों व घायलों के परिजनों से वार्ता करते-करते आकस्मित खड़ी हुई वएक महिला के साथ चल पड़ीं.

पानी में डूबे खेतों की मेड़ पर चलकर घायल की झोपड़ी में पहुंची प्रियंका, के लिए इमेज परिणाम

प्राइमरी स्कूल से गाड़ी से खेत तक व वहां से पानी में डूबे खेतों की मेड़ पर चलकर जब एक घायल की झोपड़ी में प्रियंका पहुंची तो वह अपना सब दर्द भूल गया.

सोनभद्र के उभ्भा गांव में 17 जुलाई को हुई गोलीबारी के बाद मुख्यमंत्री योगी समेत तमाम नेता पीड़ितों से मिलने व उनके आंसू पोछने गांव पहुंचा. लेकिन जहां तक प्रियंका गांधी गईं वहां तक कोई नहीं गया. प्रियंका ने पहले प्राइमरी स्कूल में जुटाए गए पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात की. बिना पंखे के करीब एक घंटे तक उमस भरी गर्मी में जमीन पर बैठ कर एक-एक पीड़ित से वार्ता करती रहीं. वार्ता के दौरान की एक महिला लालदेई ने बताया कि उसके पति रामलक्षन गोलीबारी में घायल होने के बाद आज तक झोपड़ी में पड़े हैं. इस पर प्रियंका ने तत्काल लालदेई को अपने साथ लिया व उसके कंधे पर हाथ रख पैदल ही उसकी झोपड़ी की तरफ चल दीं. प्रियंका को इस तरह खेतों की ओर जाते देख एसपीजी समेत तमाम नेता कुछ नहीं समझ सके. किसी ने पास जाकर पूछा तो प्रियंका के खेतों की ओर जाने का कारण पता चला.

जहां गाड़ी नहीं जाएगी पैदल जाएंगे
लालदेई ढाई से तीन किलोमीटर दूर अच्छा घटनास्थल के बगल में रहती हैं. उसकी झोपड़ी खेतों के बीच है व खेतों में पानी भरा है. किसी ने पूछा तो बस प्रियंका ने इतना ही कहा, जहां तक गाड़ी जा सकती है, उससे चलेंगे फिर पैदल चलेंगे. इसके बाद प्रियंका एक गाड़ी में बैठ गई. लालदेई के खेत की ओर जब प्रियंका की गाड़ी रवाना हुई तो उनके साथ सिर्फ यातायात पुलिस की ही गाड़ी थी. हड़बड़ी में स्कॉट में शामिल अन्य गाड़ियां व एसपीजी की टीम उनके पीछे रवाना हुई.

मौन साक्षी को भी प्रियंका ने देखा
सारे नरसंहार के इकलौते मौन साक्षी गवाह रहे जामुन के पेड़ के पास भी प्रियंका गई. जामुन के पेड़ के पास खड़ी प्रियंका कुछ भावुक भी दिखाई दीं. यहीं पर 17 जुलाई को 10 आदिवासियों को मृत्यु के घाट उतारा दिया गया था. यहां से लालदेई का हाथ पकड़कर प्रियंका पानी भरे खेतों के बीच से उसके घर तक पहुंचीं.लालदेई की झोपड़ी में आधे घंटे से ज्यादा समय तक रहीं व आसपास से जुटे लोगों से वार्ता की. लालदेई का सहारा लेकर पगडंडियों से ही होते हुए वापस लौटीं तो गोलीकांड के मृतक अशोक की झोपड़ी में भी गईं. उसके परिवार वालों का हाल जाना व उनके आंसू पोछे.