जम्मू और कश्मीर : ईद के बाद भी खतरा बरकरार, 15 अगस्त को लहराएगा तिरंगा

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पिछले सात दिन से जम्मू और कश्मीर में डेरा डाले हुए हैं. 05 अगस्त को कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद यह अब तक की सबसे उच्च स्तर पर बरती जा रही सतर्कता है.

प्रदेश के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम के साथ लगातार तालमेल बनाकर डोभाल प्रदेश में हर घटनाक्रम पर न केवल पैनी नजर रख रहे हैं, बल्कि केन्द्र सरकार भी आंतरिक सुरक्षा को लेकर उच्च स्तर पर सतर्कता बरत रही है.

ईद के बाद भी खतरा बरकरार

वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी प्रदेश के दशा पर दूर रहकर भी हर घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख हुए हैं. कुल मिलाकर ईद-उल-अजहा त्यौहार के शांतिपूर्वक संपन्न होने पर देश की सुरक्षा, खुफिया व प्रशासनिक एजेंसियां राहत की सांस ले रही हैं. लेकिन सूत्र बताते हैं कश्मीर घाटी में खतरा अभी समाप्त नहीं हुआ है.

15 अगस्त को लहराएगा तिरंगा

अनुच्छेद 370 व धारा 35ए के निष्प्रभावी होने एवं कश्मीर पुनर्गठन विधेयक-2019 विधेयक के पास हो जाने के बाद केंद्र सरकार के लिए 15 अगस्त भी एक चुनौती है. 14 अगस्त को पाक अपनी आजादी की 73वीं सालगिरह मनाएगा. इसके अच्छा एक दिन बाद हिंदुस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएगा. नए विधान के अनुसार अब कश्मीर में अब केवल राष्ट्रीय झण्डाही फहराया जाएगा. केंद्र सरकार व जम्मू और कश्मीर प्रशासन की प्रयास है कि सारे प्रदेश में घर-दफ्तरों पर राष्ट्रीय झण्डा फहराया जाए.

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वहीं प्रदेश की अलगाववादी ताकतों के लिए यह स्थिति असुविधाजनक सी है, क्योंकि स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश खासकर श्रीनगर में राष्ट्रीय झण्डा फहराना वहां के आवाम के रुख को दर्शाएगा. सियासी गलियारों के सूत्रों बताते हैं कि ईद-उल-अजहा का शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होना अपने आप में एक बड़ी बात है. सूत्रों का बोलना है कि कश्मीर को लेकर हिंदुस्तान जहां संवेदनशील है, वहीं बाकी राष्ट्रों की निगाहें भी प्रदेश के दशा पर टिकी हैं.

विकास चाहते हैं कश्मीरी

श्रीनगर के रहने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के एक वकील का बोलना है कि आम जनता में जम्मू और कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने को लेकर कुछ सवाल हैं, लेकिन आम तौर पर जनता सरकार के साथ है. नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर उन्होंने बताया कि वह एक हफ्ते की छुट्टी मनाने श्रीनगर जा रहे हैं व 19 अगस्त को दिल्ली वापसी होगी. उन्होंने बताया कि जाने से पहले अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी किए जाने समेत अन्य पक्षों पर उन्होंने वहां के दशा को जानने की प्रयास की है.

उनका मानना है कि कश्मीर की जनता प्रदेश में विकास, अमन की बहाली, युवाओं के लिए रोजगार, रेल, हवाई जहाज आदि सुविधाओं को चाहती है. आम कश्मीरी प्रदेश के विकास वसंसाधनों की बहाली के पक्ष में है. वे कहते हैं कि कश्मीर में आम कश्मीरी व राजनेताओं व अलगाववादी नेताओं की सोच में बहुत ज्यादा फर्क है. यही वजह है कि जनता पिछले एक हफ्तेसे न तो कर्फ्यू तोड़कर बाहर आ रही है व न ही उसे हिंसा का रास्ता अख्तियार कर रही है.

प्रधानमंत्री व गृह मंत्री कर रहे हैं कश्मीर दौरे से परहेज

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, केन्द्रीय गृहमंत्री व प्रदेश के गवर्नर महामहिम सत्यपाल मलिक मुख्य किरदार में हैं. गृहमंत्री अमित शाह व पीएम नरेन्द्र मोदी अभी प्रदेश में दशा का जायजा लेने आदि जैसी किसी स्थिति से परहेज करने की रणनीति पर अमल कर रहे हैं. वहीं प्रदेश के गवर्नर लोगों से शांति बनाए रखने तथा शीर्ष नेताओं से सम्पर्क के कोशिश में लगे हैं.

केंद्रीय गृहसचिव राजीव गाबा व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील हैं. विदेश मंत्री एस जय शंकर व विदेश सचिव विजय गोखले ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर सबको साधने की कमान संभाल रखी है. मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम, गवर्नर के सलाहकार के विजयकुमार, प्रदेश में वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा, प्रदेश के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह, आईबी आईबी व रॉ के प्रमुख कश्मीर में शांति बहाली के लिए महत्वपूर्ण हर तरीका को अजमा रहे हैं.

लोगों से सीधे बातचीत

राज्य में अमन की बहाली के लिए केंद्र सरकार ने पीपुल-टू-पीपुल रिलेशन को उच्च अहमियत पर लेकर चल रही है. प्रदेश में भावनाओं को भड़काने वाले हर तरह के तत्वों पर कठोरनिगरानी चल रही है. इतना ही नहीं सियासी दलों से भी अनर्गल बयानबाजी न करने का आग्रह किया गया है. प्रदेश में सियासी व अलगाववादी नेताओं को छोड़कर शेष अन्य सभी प्रभावी सामाजिक लोगों, व्यक्तियों से सम्पर्क किया जा रहा है. उन्हें केंद्र सरकार का उद्देश्य व कश्मीर के विकास के एजेंडे तथा इसके दूरगामी प्रभावों के बारे में समझाया जा रहा है.

अंतरिक्ष से भी नजर

राज्य व खासकर घाटी के लोगों की आवश्यकता को समझकर सरकार उच्च स्तर पर कोशिश कर रही है. प्रदेश में इंटरनेट समेत अन्य संचार सेवाओं को लेकर सतर्कता बरती जा रही है. प्रदेश में धारा 144 लागू है. सरकार की योजना कर्फ्यू में अब धीरे-धीरे ढील देने की है. सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बलों को भेजा है व आवश्यकता के हिसाब से स्टैंड बाई स्थिति में है. इसके अतिरिक्त सरकार नियंत्रण रेखा पर सरकार अंतरिक्ष से भी नजर रख रही है.

पाकिस्तान के हुक्मरान हैं परेशान

जम्मू-कश्मीर के ताजा हालातों को देखकर पाक के हुक्मरान में भी खासी कठिनाई देखी जा रही है. पाक की मदद से चलने वाली अलगाववादी ताकतें कश्मीर में विरोध व हिंसा की कोशिशों को बढ़ावा देने में लगी हैं. भारतीय रणनीतिकार जानते हैं कि पाक कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय मामला बनाने के लिए इस तरह की कोशिशों को अंजाम दे रहा है. वहीं हिंदुस्तान भी जानता है कि प्रदेश में शांति स्थापना से दुनिया समुदाय को ठीक संदेश दिया जा सकता है.