इतने सालो बाद बन रहा है चंद्र-मंगल का दृष्टि संबंध महालक्ष्मी की हो सकती है कृपा

 इतने सालो बाद बन रहा है चंद्र-मंगल का दृष्टि संबंध महालक्ष्मी की हो सकती है कृपा

इस वर्ष 13 अक्टूबर रविवार कोशरद पूर्णिमा पर 30 वर्ष बाद दुर्लभ योग बन रहा है. ये शुभ योग चंद्रमा व मंगल के आपस में दृष्टि संबंध होने से बन रहा है. जिसे महालक्ष्मी योग बोला जाता है.शरद पूर्णिमा पर इस शुभ योग के बनने से ये पर्व व ज्यादा खास हो जाएगा.अश्विन माह की इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं. माना जाता है कि इस तिथि पर देवी लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं व जो जाग कर देवी की पूजा करता है उस पर माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. इस शरद पूर्णिमा पर महालक्ष्मी योग में देवी की पूजा करने का सौभाग्य 30 वर्ष बाद मिल रहा है. जिससे इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर स्वास्थ्य के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार होने के योग बन रहे हैं.

  • ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति

इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा मीन राशि व मंगल कन्या राशि में रहेगा. इस तरह दोनों ग्रह आमने-सामने रहेंगे. वहीं मंगल, हस्त नक्षत्र में रहेगा. जो कि चंद्रमा के स्वामित्व वाला नक्षत्र है. इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिति 14 अक्टूबर 1989 में बनी थी. हालांकि 6 अक्टूबर 2006 व 20अक्टूबर 2002 में भी चंद्रमा अौर मंगल का दृष्टि संबंध बना था, लेकिन मंगल, चंद्रमा के नक्षत्र में नहीं था.

  • महत्वपूर्ण कार्य करने का दिन

पूर्णा तिथि व महालक्ष्मी योग बनने से शरद पूर्णिमा पर खरीदारी व नए कार्य प्रारम्भ करना शुभ रहेगा. इस शुभ संयोग में प्रॉपर्टी, निवेश व जरूरी लेन-देन करने से धन फायदा होने की आसार व बढ़ जाएगी. नौकरी व बिजनेस करने वाले लोगों के लिए पूरा दिन लाभकारी रहेगा. इसके साथ हीसेविंग भी बढ़ेगी. इस दिन पद ग्रहण करना या नया दायित्व लेना भी शुभ है. इस दिन किए गए कार्य लंबे समय तक लाभ देने वाले रहेंगे.

क्या करें शरद पूर्णिमा पर

  1. इस रात में ग्रहण की गई औषधि बहुत जल्दी फायदा पहुंचाती है.
  2. शरद पूर्णिमा पर चंद्र की किरणें भी हमें फायदा पहुंचाती हैं. इसलिए इस रात में कुछ देर चांद की चांदनी में बैठना चाहिए. ऐसा करने पर मन को शांति मिलती है. तनाव दूर होता है.
  3. शरद पूर्णिमा की रात घर के बाहर दीपक जलाना चाहिए. इससे घर में सकारात्मकता बढ़ती है.
  4. शरद पूर्णिमा की चांद को खुली आंखों से देखना चाहिए. क्योंकि इससे आंखों की समस्या नहीं होती.
  5. पूरे दिन व्रत रखें व पूर्णिमा की रात्रि में जागरण करें. व्रत करने वाले को चन्द्र को अर्घ्य देने के बाद ही अनाज ग्रहण करना चाहिए.