शिवसेना ने विकास दुबे के एनकाउंट को लेकर कही ये बाते...

शिवसेना ने विकास दुबे के एनकाउंट को लेकर कही ये बाते...

 उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) में 8 पुलिसवालों की मर्डर का मुख्य आरोपी विकास दुबे (Vikas Dubey) पुलिस एनकाउंट में ढेर हो चुका है। उसकी मृत्यु के बाद देश भर में पॉलिटिक्स प्रारम्भ हो गई है।

देश के कई लोग व नेता इस एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन शिवसेना (Shiv sena) ने इस एनकाउंटर (Encounter) को ठीक ठहराया है। अपने मुख लेटर सामना में लिखे संपादकीय में बोला है कि जो लोग भी इस एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं वो 8 पुलिसवालों की वीरगति का अपमान कर रहे हैं। साथ ही लिखा है कि विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद यूपी ही नहीं, बल्कि देश भर की जनता ने चैन की सांस ली है।

एनकाउंटर पर सवाल क्यों?
शिवसेना के मुताबिक मानवतावादी व लोकतंत्र के संरक्षक चाहे जो कहें, लेकिन जनता ने इस एनकाउंटर का स्वागत किया है। सामना में लिखा है, ' विकास दुबे कोई साधारण पॉकेटमार नहीं था, बल्कि वह एक गैंगस्टर व आतंकी था। वह पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। इस एनकाउंटर पर सवाल क्यों? इस पर सवाल करना मतलब दुबे द्वारा किए गए हत्याकांड में 8 पुलिसवालों की वीरगति का अपमान है। '

विकास दुबे कोई संत-महात्मा या समाजसेवक नहीं था
शिवसेना के मुताबिक लोग इस एनकाउंटर को लेकर जबरदस्ती शोर मचा रहे हैं। सामना में आगे लिखा है, 'इस पर इतना शोक क्यों? विकास दुबे के एनकाउंटर के बारे में कुछ सवाल उठाए जा रहे हैं। उसमें सच्चाई होगी भी। लेकिन उसकी मृत्यु के बाद मानवाधिकारवादी जिस प्रकार से गला फाड़ कर आक्रोश कर रहे हैं, वह समझ से बाहर है। विकास दुबे कोई संत-महात्मा या समाजसेवक नहीं था। वह किसी की सुपारी लेकर उनकी कीड़े-मकोड़ों की तरह निर्ममता से मर्डर कर देनेवाला क्रिमिनल था। इसलिए मुठभेड़ में मारे गए दुबे की मृत्यु पर इतने कोलाहल की जरूरत नहीं है। '

विकास दुबे के प्रति पुलिसवाले भी दया क्यों दिखाएं
सामना ने संपादकीय में बोला है की आठ पुलिसवालों के हत्याकांड के बाद उन पर डीजल डालकर उन्हें जला डालने का क्रूर कोशिश भी दुबे ने किया। पुलिसवालों की जान लेते समय जरा भी दया न दिखानेवाले विकास दुबे के प्रति पुलिसवाले भी दया दिखाएं, ऐसी अपेक्षा करना ही नादानी है।

पुलिस का मनोबल निर्बल न करें
सामना में आगे लिखा है, 'मानवतावादी व लोकतंत्र के संरक्षक चाहे जो कहें, लेकिन जनता ने इस एनकाउंटर का स्वागत किया है। कुछ तर्कवादियों का बोलना है कि अगर विकास दुबे को भाग ही जाना था तो वह सेरेण्डर क्यों करता? लोकतंत्र में इस प्रकार के सवाल उठाने की छूट भले ही हो लेकिन ऐसी भी बात नहीं करनी चाहिए, जिससे पुलिस बल का मनोबल निर्बल हो। '