मोदी-जिनपिंग केमिस्ट्री से सुलझा सकते हैं भारत व चाइना के बीच टकराव, हर स्तर पर करेगा जवाबी तैयारी

मोदी-जिनपिंग केमिस्ट्री से सुलझा सकते हैं भारत व चाइना के बीच टकराव, हर स्तर पर करेगा जवाबी तैयारी

भारत व चाइना के बीच बीते कुछ सालों में तनाव बढ़ाने वाली कई घटनाएं हुई हैं, लेकिन डोकलाम के बाद लद्दाख इलाके में चल रहे टकराव ने तनाव को चरम पर पहुंचाया है.

जानकारों का मानना है कि समय कितना भी लगे, पर दोनों राष्ट्रों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बीते कुछ सालों में बनी सहमति टकराव को निपटाने का प्रमुख आधार है. मोदी-जिनपिंग केमिस्ट्री से टकराव सुलझ सकता है.

वुहान व महाबलीपुरम की अनौपचारिक बैठकों में तय हुआ था कि दोनों देश टकराव को तय नीतियों के तहत निपटाएंगे. इसी के जरिए सीमा पर तनाव कम करने की प्रयास भी हो रही है. विदेश मंत्रालय ने परस्पर वार्ता में शांति और स्थिरता के लिए दोनों राष्ट्रों में पूर्व में हुए समझौतों को आधार बनाया है.

भारत ने हर स्तर पर जवाबी तैयारी की: चीनी सेना इंडियन आर्मी के जवानों को फिंगर-4 से आगे जाने नहीं दे रहे हैं. हिंदुस्तान की मांग है कि चीनी सेना वापस चली जाए. हिंदुस्तान अपनी सीमा के भीतर निर्माण पर चाइना की असहमति को भी खारिज कर रहा है. हालांकि, हिंदुस्तान ने पूरी तरह से जवाबी रणनीति पर कार्य करते हुए हर स्तर पर तैयारी की है.

सकारात्मक माहौल में वार्ता हुई: सेना के एक वरिष्ठ ऑफिसर ने बताया कि सकारात्मक माहौल में वार्ता हुई. सूत्रों ने बताया कि चुशूल सेक्टर में एलएसी के चीनी पक्ष की तरफ माल्डो में सीमा कर्मी मीटिंग स्थल पर प्रातः काल करीब साढ़े आठ बजे बातचीत प्रस्तावित थी, लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्र में बेकार मौसम की वजह से मीटिंग तीन घंटे देर से प्रारम्भ हुई.
 
अविश्वास को कम करने का कोशिश जारी: सूत्रों ने बोला कि मोदी-जिनपिंग की केमेस्ट्री का ही प्रभाव है कि जब भी तनाव चरम पर होता है, उसे ठंडा करने को सैन्य स्तर के अतिरिक्त कूटनीतिक चैनल खोल दिए जाते हैं. कूटनीतिक स्तर पर भी बात जारी है, कोरोना संकट के बाद उपजी परिस्थितियों ने ऐसे दशा पैदा किए हैं, जिससे अविश्वास की खाई थोड़ी गहरी हुई है.