बिहार के जल संसाधन विभाग ने किया तटबंध पर दबाव बढ़ने के बाद अलर्ट जारी

बिहार के जल संसाधन विभाग ने किया तटबंध पर दबाव बढ़ने के बाद अलर्ट जारी

नेपाल के तराई क्षेत्र (Terai region of Nepal) और उत्तर बिहार के मैदानी इलाकों में लगातार बारिश से दशा बिगड़ते जा रहे हैं। इन इलाकों की सभी नदियों में उफान है व कई तो खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। 

नदियों के किनारे बने तटबंधों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। बिहार के जल संसाधन विभाग (Water Resources Department of Bihar) ने कई जिलों में तटबंध पर दबाव बढ़ने के बाद अलर्ट जारी कर दिया है। ​ऐसे में इन नदियों की जद में आने वाले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।  वहीं जल संसाधन विभाग ने बाढ़ से सुरक्षा संबंधी सूचना के लिए टॉल फ्री नं। 18003456145 जारी किया है।

बताते चलें कि राज्य भर में भारी बारिश की चेतावनी को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग ने NDRF व SDRF  की टीमों को तैयार रहने को बोला है। दरअसल मौसम विभाग ने 12 जुलाई तक बागमती बेसिन में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इससे बिहार के 14 जिलों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न होने की संभावना है।  ऐसा हुआ तो कम- से- कम 50 लाख की आबादी बाढ़ संकट में फंस सकती है।

इस बीच राज्य की नदियों में जल स्तर बढ़ने व बाढ़ की संभावना होने पर सरकार ने 15 जिलों में निचले इलाकों में रहने वाली आबादी को ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की की जा रही है। इस बात की जानकारी जल संसाधन विभाग के मंत्री संजय कुमार झा ने ट्वीट पर भी दी है।

नेपाल एवं उत्तर बिहार के कई जिलों में 13 जुलाई तक भारी वर्षापात की आसार के मद्देनजर, नदियों का जलस्तर बढ़ने पर निचले इलाकों की आबादी को ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट करने की तैयारी है.

ऐसे इलाकों का ब्योरा संलग्न है. वहां के लोगों से भी अनुरोध है कि इस दौरान पर्याप्त सतर्कता बरतें. 

बता दें कि प्रदेश में हो रही भारी बारिश को देखते हुए मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बारिश के कारण उत्पन्न बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारियों को निचले इलाके से लोगों को शिफ्ट करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी बोला है कि  बारिश व बाढ़ को लेकर माइक से लोगों को जानकारी दी जाए व आम जनों को सतर्क किया जाए।

बता दें कि गंडक के जलग्रहण क्षेत्र नेपाल के पोखरा में पिछले शुक्रवार शाम तक एक दिन में 250.9 मिमी और भैरवा में 134.3 मिमी बारिश हुई। इस वजह से गंडक के जलस्तर में बहुत ज्यादा उछाल आया है।  यही वजह रही कि शुक्रवार देर शाम तक वाल्मीकिनगर बराज से 2.80 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया।  गंडक के जलस्तर में वृद्धि की संभावना को देखते हुए पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज और सारण के अधिकारियों को अलर्ट किया गया है।

वहीं जलग्रहण क्षेत्र सिमरा में 128.4 और काठमांडू में 27.5 मिमी बारिश होने के बाद बागमती का जलस्तर भी बढ़ा है। ऐसे में सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा के अधिकारियों को अलर्ट किया गया है। वहीं कोसी नदी में भी जल स्तर बढ़ने की साथ ही इसकी तेज धार कठिनाई का सबब बनती जा रही है। शुक्रवार देर शाम तक सुपौल स्थित बीरपुर बराज से 2.30 लाख क्यूसेक पानी कोसी में छोड़ा गया, जबकि सामान्यत: यहां से डेढ़ लाख क्यूसेक तक ही पानी छोड़ा जाता है। वहीं पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर बराज से 2.64 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।

इस बीच मुजफ्फरपुर में बागमती व लालबकेया नदी सीतामढ़ी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। शुक्रवार देर शाम तक बागमती कटौंझा में 80 सेमी, ढेंग में 82 सेमी और सोनाखान में 36 सेमी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। वहीं मधुबनी में कमला खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर थी। बागमती बेनीबाद में खतरे के निशान से 25 सेमी ऊपर है तो जयनगर में कमला खतरे के निशान से एक सेमी ऊपर बह रही थी।