इंडियन रेलवे का पहला रेस्तरां ऑन व्हील आसनसोल डिविजन में हो गया है प्रारम्भ, रेल अधिकारियों ने कही यह बड़ी बात

इंडियन रेलवे का पहला रेस्तरां ऑन व्हील आसनसोल डिविजन में हो गया है प्रारम्भ, रेल अधिकारियों ने कही यह बड़ी बात

इंडियन रेलवे का पहला रेस्तरां ऑन व्हील आसनसोल डिविजन में बुधवार को प्रारम्भ किया गया. रेल अधिकारियों ने बताया कि रेल यात्रियों को आकर्षित करने के लिए दो मेमू कोच (कबाड़ घोषित) को नया रंगरूप देकर आसनसोल डिविजन में खोला गया है. 

रेल यात्रियों व आम जनता को लुभाने के लिए दो मेमू कोच के आगे एक भाप का इंजन भी लगाया गया है. रेलवे बोर्ड पुराने कोच को कबाड़ में बेचने के बजाए उनकी मरम्मत कर रेस्तरां का रूप देगा. नॉन फेयर रेवेन्यू (एनएफआर) नीति के तहत यह अलावा कमाई का जरिया बताया जा रहा है. रेस्तरां ऑन व्हील रेलवे स्टेशनों के परिसर में खोला जाएगा. इसका मकसद रेल यात्रियों को आकर्षित करना है.

यह रेल यात्रियों व आम जनता दोनों के सेवाएं देगा. पूर्वी रेलवे के एक ऑफिसर ने बोला कि दो बहुत पुराने मेमू कोचों को रेस्टोरेंट के रूप में विकसित किया गया है. जहां एक कोच में चाय व नाश्ते के आउटलेट के रूप में उपयोग किया जाएगा, वहीं दूसरा पूर्ण रूप से 42 लोगों के बैठने वाला रेस्तरां होगा. यहां ब्रेक फास्ट, लंच व डिनर उचित मूल्य पर मिलेंगे.

एनएफआर नीति के तहत रेलवे की आय बढ़ाने के लिए कबाड़ कोच को रेस्तरां में तब्दील किया जाएगा. अगले पांच वर्षों में उक्त रेस्तरां ऑन व्हील से 50 लाख रुपये की कमाई होने की उम्मीद है. इसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने किया था. इसके अतिरिक्त इस मौके पर दो नए वातानुकूलित रिटायरिंग रूम व एक इलेक्ट्रॉनिक रिज़र्वेशन चार्ट डिस्प्ले सिस्टम व एक बैटरी संचालित कार का भी उद्घाटन पर्यावरण, वन व जलवायु बदलाव प्रदेश मंत्री द्वारा किया गया.

मैसूर में क्लास रूम बनाया गया

सके पूर्व पुराने कोच में परिवर्तन कर मैसूर में क्लास रूम बनाया गया है. बिहार के दानापुर में स्टाफ कैंटीन और राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली में आफिस बनाया गया है. ऑफिसर का बोलना है कि यह मॉडल पास होने पर देश के अन्य रेलवे स्टेशन परिसर में रेस्तरां ऑन व्हील खोले जा सकते हैं.

ECR ने एक बयान में बोला कि रेलवे ने पटना में कोचिंग डिपो के अंदर वाटर रिसाइकलिंग प्लांट के पास एक अप्रयुक्त कोच को एक कैफेटेरिया में बदल दिया. एक बार में इसमें लगभग 40 लोग अंदर बैठ सकते हैं व नाश्ता कर सकते हैं.

रेलवे ने कोच की दीवार पर कुछ पेंटिंग्स लगाकर कोच के अंदरूनी हिस्सों को संवारने का भी विशेष कोशिश किया गया है. इसमें टाइपराइटर व दानापुर रेलवे स्टेशन की पुरानी तस्वीर और कुछ पुराने उपकरणों को भी रखा गया है.